धनतेरस {Dhanteras} 2025

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By pitarawala01

🪔 धनतेरस 2025: धन, आरोग्य और शुभारंभ का पर्व

भारत त्योहारों का देश है, जहां हर पर्व अपनी एक अनोखी महत्ता रखता है। इन्हीं में से एक प्रमुख पर्व है धनतेरस, जो दीपावली की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व न केवल धन और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि आरोग्य और आयु के वरदान से भी जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं धनतेरस का इतिहास, महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़ी कुछ विशेष परंपराएं।


🌟 धनतेरस का अर्थ और नाम की उत्पत्ति

“धनतेरस” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — ‘धन’ और ‘तेरस’। ‘धन’ का अर्थ है संपत्ति या समृद्धि, जबकि ‘तेरस’ का अर्थ है कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की तेरहवीं तिथि। इस दिन भगवान धनवंतरि का जन्म हुआ था, जो आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता माने जाते हैं। इसी कारण इस दिन को “धनवंतरि जयंती” भी कहा जाता है।


🕉️ धनतेरस का पौराणिक इतिहास

पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु के आदेश पर देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया। इस मंथन से 14 रत्न निकले, जिनमें से एक थे भगवान धनवंतरि, जो अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार, यमराज से राजा हिमा के पुत्र की रक्षा भी इसी दिन हुई थी। कहा जाता है कि राजा के पुत्र की मृत्यु का योग था, लेकिन उसकी पत्नी ने दीपक जलाकर द्वार पर सोने-चांदी के गहने और सिक्के रख दिए थे। जब यमराज वहां पहुंचे, तो दीपक की रोशनी और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं, और वे बिना कुछ किए लौट गए। तभी से धनतेरस की रात दीपदान का विशेष महत्व है।


💰 धनतेरस का धार्मिक और सामाजिक महत्व

धनतेरस का संबंध धन, स्वास्थ्य और समृद्धि से है। इस दिन लोग नए बर्तन, चांदी-सोना, और घर की जरूरत की चीजें खरीदते हैं। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में लक्ष्मी का आगमन कराती हैं। व्यापारी वर्ग के लिए यह दिन नए खाते (बही-खाते) शुरू करने का भी शुभ अवसर होता है।

साथ ही, यह दिन स्वास्थ्य की सुरक्षा और आरोग्य की प्रार्थना का भी होता है, क्योंकि भगवान धनवंतरि को आयुर्वेद का जनक माना गया है। इसलिए लोग इस दिन अपने स्वास्थ्य के लिए भी प्रार्थना करते हैं।


🪔 धनतेरस की पूजा विधि {धनतेरस 2025: धन, आरोग्य और शुभारंभ का पर्व }

धनतेरस की पूजा का समय और विधि अत्यंत शुभ मानी जाती है। नीचे पूजा की मुख्य प्रक्रिया दी गई है:

  1. घर की सफाई और सजावट:
    इस दिन घर को साफ-सुथरा कर रंगोली बनाई जाती है और दीपक जलाए जाते हैं।

  2. धनवंतरि भगवान की पूजा:
    पीतल या चांदी के पात्र में जल, पुष्प और चंदन रखकर भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है।

  3. दीपदान:
    शाम को घर के मुख्य द्वार, आंगन और तुलसी के पास दीपक जलाए जाते हैं। यमराज के नाम का एक दीप दक्षिण दिशा में जलाना शुभ माना जाता है।

  4. खरीदारी का महत्व:
    लोग इस दिन सोना, चांदी, तांबा या पीतल के बर्तन खरीदते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है।


🌼 धनतेरस से जुड़े शुभ कार्य

  • नए व्यापार या कार्य की शुरुआत करना

  • घर में नया सामान लाना

  • वाहन, गहने, या इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं खरीदना

  • दान और सेवा करना

धनतेरस पर यदि कोई व्यक्ति गरीबों को दीपक, कपड़े, भोजन या धन का दान करता है, तो यह कई गुना फल देता है।


🧘‍♀️ स्वास्थ्य और धन का संगम

धनतेरस सिर्फ धन की पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें स्वास्थ्य के महत्व की भी याद दिलाता है। भगवान धनवंतरि ने आयुर्वेद का ज्ञान मानव कल्याण के लिए दिया था। इस दिन लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होते हैं और स्वास्थ्य संबंधी वस्तुएं जैसे आयुर्वेदिक औषधियां, तांबे के पात्र आदि भी खरीदते हैं।


🌺 धनतेरस और दीपावली का संबंध

धनतेरस से दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है। इसके बाद नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, और भाई दूज मनाए जाते हैं। इस प्रकार धनतेरस एक शुभ आरंभ है, जो पूरे त्योहार में उल्लास भर देता है।


🌕 धनतेरस 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • तिथि: 20 अक्टूबर 2025, सोमवार

  • पूजा मुहूर्त: सायं 6:45 से रात 8:15 तक (लगभग)

  • दीपदान का समय: सूर्यास्त के बाद से रात्रि 8 बजे तक शुभ माना गया है।


🙏 निष्कर्ष

धनतेरस का पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्चा धन केवल सोना-चांदी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सदाचार, और संतोष है। जब घर में प्रेम, स्वास्थ्य और समृद्धि होती है, तभी जीवन पूर्ण बनता है।
इस धनतेरस पर हम सब यही प्रार्थना करें कि भगवान धनवंतरि हमें उत्तम स्वास्थ्य, लक्ष्मी माता हमें अपार संपदा, और दीपों की रोशनी हमारे जीवन को उज्जवल बना दे।


🌸 “आपको और आपके परिवार को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं!” 🪔

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